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Shree Vishnu Chalisa

Shree Vishnu Chalisa 

 दोहा ॥
जै जै श्री जगत पति जगदाधार अनन्त ।
विश्वेश्वर अखिलेश अज सर्वेश्वर भगवन्त ॥
॥ चौपाई ॥
जै जै धरणीधर श्रुति सागर । जयति गदाधर सद्गुण आगर ॥
श्री वसुदेव देवकी नंदन । वासुदेव नाशन भव फन्दन ॥1॥
नमो नमो सचराचर स्वामी । परंब्रह्म प्रभु नमो नमो नमामि ॥
नमो नमो त्रिभुवन पति ईश । कमलापति केशव योगीश ॥2॥
गरुड़ध्वज अज भव भय हारी । मुरलीधर हरि मदन मुरारी ॥
नारायण श्रीपति पुरुषोत्तम । पद्मनाभि नरहरि सर्वोत्तम ॥3॥
जै माधव मुकुन्द वनमाली । खल दल मर्दन दमन कुचाली ॥
जै अगणित इन्द्रिय सारंगधर । विश्व रुप वामन आन्नद कर ॥4॥
जै जै लोकाध्यक्ष धनंजय । सहस्त्रज्ञ जगन्नाथ जयति जै ॥
जै मधुसूदन अनुपम आनन । जयति वायु वाहन वज्र कानन ॥5॥
जै गोविन्द जनार्दन देवा । शुभ फल लहत गहत तव सेवा ॥
श्याम सरोरुह सम तन सोहत । दर्शन करत सुर नर मुनि मोहत ॥6॥
भाल विशाल मुकुट सिर साजत । उर वैजन्ती माल विराजत ॥
तिरछी भृकुटि चाप जनु धारे । तिन तर नैन कमल अरुनारे ॥7॥
नासा चिबुक कपोल मनोहर । मृदु मुस्कान कुञ्ज अधरन पर ॥
जनु मणि पंक्ति दशन मन भावन । बसन पीत तन परम सुहावन ॥8॥
रुप चतुर्भज भूषित भूषण । वरद हस्त मोचन भव दूषण ॥
कंजारुन सम करतल सुन्दर । सुख समूह गुण मधुर समुन्दर ॥9॥
कर महँ लसित शंख अति प्यारा । सुभग शब्द जै देने हारा ॥
रवि सम चक्र द्वितीय कर धारे । खल दल दानव सैन्य संहारे ॥10॥
तृतीय हस्त महँ गदा प्रकाशन । सदा ताप त्रय पाप विनाशन ॥
पद्म चतुर्थ हाथ महँ धारे । चारि पदारथ देने हारे ॥11॥
वाहन गरुड़ मनोगतिवाना । तिहुँ त्यागत जन हित भगवाना ॥
पहुँचि तहाँ पत राखत स्वामी । हो हरि सम भक्तन अनुरागी ॥12॥
धनि धनि महिमा अगम अन्नता । धन्य भक्तवत्सल भगवन्ता ॥
जब जब सुरहिं असुर दुख दीन्हा । तब तब प्रकटि कष्ट हरि लीन्हा ॥13॥
सुर नर मुनि ब्रहमादि महेशू । सहि न सक्यो अति कठिन कलेशू ॥
तब तहँ धरि बहुरुप निरन्तर । मर्द्यो दल दानवहि भयंकर ॥14॥
शय्या शेष सिन्धु बिच साजित । संग लक्ष्मी सदा विराजित ॥
पूरन शक्ति धन्य धन खानी । आन्नद भक्ति भरणी सुख दानी ॥15॥
जासु विरद निगमागम गावत । शारद शेष पार नहीं पावत ॥
रमा राधिका सिय सुख धामा । सोही विष्णु कृष्ण अरु रामा ॥16॥
अगणित रुप अनूप अपारा । निर्गुण सगण स्वरुप तुम्हारा ॥
नहिं कछु भेद वेद अस भासत । भक्तन से नहिं अन्तर राखत ॥17॥
श्री प्रयाग दुवाँसा धामा । सुन्दरदास तिवारी ग्रामा ॥
जग हित लागि तुम्हिं जगदीशा । निज मति रच्यो विष्णु चालीसा ॥18॥
जो चित्त दै नित पढ़त पढ़ावत । पूरन भक्त्ति शक्ति सरसावत ॥
अति सुख वसत रुज ऋण नाशत । वैभव विकासत सुमति प्रकाशत ॥19॥
आवत सुख गावत श्रुति शारद । भाषन व्यास वचन ऋषि नारद ॥
मिलत सुभग फल शोक नसावत । अन्त समय जन हरि पद पावत ॥20॥
॥ दोहा ॥
प्रेम सहित गहि ध्यान महँ हृदय बीच जगदीश ।
अर्पित शालिग्राम कहँ करि तुलसी नित शीश ॥
क्षणभंगुर तनु जानि करि अहंकार परिहार ।
सार रुप ईश्वर लखै तजि असार संसार ॥
सत्य शोध करि उर गहै एक ब्रह्म ओंकार ।
आत्मबोध होवै तबै मिलै मुक्त्ति के द्वार ॥
शान्ति और सद्भाव कहँ जब उर फूलहिं फूल ।
चालिसा फल लहहिं जहँ रहहिं ईश अनुकूल ॥
एक पाठ जन नित करै विष्णु देव चालीस ।
चार पदारथ नवहुँ निधि देय द्वारिकाधीश ॥
Shree Vishnu Chalisa in English:
॥ Doha ॥
Jai jai Shri Jagat Pati jagadadhar anant ।
Vishweshwar akhilesh aj, Sarveshwar Bhagwant ॥
॥ Chaupai ॥
Jai jai Dhranidhar shruti sagar । jayati Gadadhar sadgun agar ॥
Shri Vasudev Devaki nandan । Vasudev, nasan-bhav-phandan ॥1॥
Namo-namo sacharachar-swami । Param brahma prabhu namo namo namami ॥
Namo-namo Tribhuvan pati Ish । Kamala pati keshav yogish ॥2॥
Garudadhwaja aj bhav bhai hari । Murlidhar Hari Madan murari ॥
Narayan Shripati Purshottam । Padmanabhi narhari sarvottam ॥3॥
Jai Madhav Mukund vanmali । Khal dal mardan, daman-kuchali ॥
Jai agnit indriya sarangdhar । Vishva rup Vaman anand kar ॥4॥
Jai jai lok adhyaksh-dhananijai । Sahastragya Jaganath jayati jai ॥
Jai Madhusudan anupam anan । Jayati Vayu-vahan vajra kanan ॥5॥
Jai Govind Janardan deva । Shubh phal lahat gahat tav seva ॥
Shyam saroruh sam tan sohat । Darsha karat, sur nar muni mohat ॥6॥
Bhai vishal mukut shir sajat । Urr vaijanti mal virajat ॥
Tirchhi Bhrikuti chap janu dhare । Tin tar nain kamal arunare ॥7॥
Nasha chibuk kapol manohar । Mridu muskan kunj adharan par ॥
Janu mani pankti dashan man bhavan । Basan pit tan param suhawan ॥8॥
Rup chaturbhuj bhushit bhushan । Varad hast mochan bhav dushan ॥
Kanjarun sam kartal sundar । Sukh samuh gun madhur samundar ॥9॥
Kar mahan lasit shankh ati pyara । Subhag shabda jai dene hara ॥
Ravi sam chakra dvitiya kar dhare । Khal dal danav sainya sanhare ॥10॥
Tritiya hast mahan gada prakashan । Sada tap traya pap vinashan ॥
Padma chaturth hath mahah dhare । Chari padarath dene hare ॥11॥
Vahan Garud manogativana । Tihun tyagat jan hit Bhagwana ॥
Pahunchi tahan pat rakhat svami । Ko Hari sam bhaktan anugami ॥12॥
Dhani dhani mahima agam ananta । Dhanya bhaktavatsal Bhagvanta ॥
Jab jab surahin asur dukh dinha । Taba tab prakati kasht Hari linha ॥13॥
Sab nar muni Brahmadi Maheshu । Sahi na sakyo ati kathin kaleshu ॥
Tab tahan dhari bahu rup nirantar । Mardyo dal danavahi bhayankar ॥14॥
Shaiya shesh Sindhu beach sajit । Sang Lakshmi Sada Virajit ॥
Puran shakti dhanya dhan khani । Anand bhakti bharani sukh dani ॥15॥
Jasu virad nigamagamam gavat । Sharad shesh par nahin pavat ॥
Rama Radhika Siya sukh dhama । Sohi Vishnu Krishna aru Rama ॥16॥
Aganit rup anup apara । Nirgun sagun svarup tumhara ॥
Nahin kachhu bhed ved as bhashat । Bhaktan se nahin antar rakhat ॥17॥
Shri Prayag Durvasa dhama । Sundardas Tivari grama ॥
Jag hit lagi tumhin Jagdisha । Nij mati rachyo Vishnu Chalisa ॥18॥
Jo chit dai nit padhat padhavat । Puran bhakti shakti sarsawat ॥
Ati sukh vasat ruj rin nasat । Vaibhav vikashat sumati prakashat ॥19॥
Aavat sukh gavat shruti sharad । Bhashat Vyas bachan rishi Narad ॥
Milat subhag phal shok nasavat । Ant sainaya jan Han pad pavat ॥20॥
॥ Doha ॥
Prem sahit gahi dhyan mahan hridai bich Jagdish ।
Arpit Shaligram kahan kari Tulasi nit shish ॥
Kshan bhangur tanu jani kari ahankar parihar ।
Saar rup Ishvar lakhai taji asar sansar ॥
Satya shodh kari ur gaha ek Brahma Omkar ।
Atmabodh hovai tabai milai mukti ke dvar ॥
Shanti aur sadbhav kahan jab ur phulahin phul ।
Chalisa phal lahahin jahn rahahi Ish anukul ॥
Ek path jan nit kare Vishnu Dev Chalisa ।
Char padarath navahun nidhi deyan Dwarkadhis ॥
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Shree Tulasi Chalisa

Shree Tulasi Chalisa 

                                                         
॥दोहा॥
जय जय तुलसी भगवती सत्यवती सुखदानी।
नमो नमो हरि प्रेयसी श्री वृन्दा गुन खानी॥
श्री हरि शीश बिरजिनी, देहु अमर वर अम्ब।
जनहित हे वृन्दावनी अब न करहु विलम्ब॥
॥चौपाई॥
धन्य धन्य श्री तलसी माता। महिमा अगम सदा श्रुति गाता॥
हरि के प्राणहु से तुम प्यारी। हरीहीँ हेतु कीन्हो तप भारी॥
जब प्रसन्न है दर्शन दीन्ह्यो। तब कर जोरी विनय उस कीन्ह्यो॥
हे भगवन्त कन्त मम होहू। दीन जानी जनि छाडाहू छोहु॥
सुनी लक्ष्मी तुलसी की बानी। दीन्हो श्राप कध पर आनी॥
उस अयोग्य वर मांगन हारी। होहू विटप तुम जड़ तनु धारी॥
सुनी तुलसी हीँ श्रप्यो तेहिं ठामा। करहु वास तुहू नीचन धामा॥
दियो वचन हरि तब तत्काला। सुनहु सुमुखी जनि होहू बिहाला॥
समय पाई व्हौ रौ पाती तोरा। पुजिहौ आस वचन सत मोरा॥
तब गोकुल मह गोप सुदामा। तासु भई तुलसी तू बामा॥
कृष्ण रास लीला के माही। राधे शक्यो प्रेम लखी नाही॥
दियो श्राप तुलसिह तत्काला। नर लोकही तुम जन्महु बाला॥
यो गोप वह दानव राजा। शङ्ख चुड नामक शिर ताजा॥
तुलसी भई तासु की नारी। परम सती गुण रूप अगारी॥
अस द्वै कल्प बीत जब गयऊ। कल्प तृतीय जन्म तब भयऊ॥
वृन्दा नाम भयो तुलसी को। असुर जलन्धर नाम पति को॥
करि अति द्वन्द अतुल बलधामा। लीन्हा शंकर से संग्राम॥
जब निज सैन्य सहित शिव हारे। मरही न तब हर हरिही पुकारे॥
पतिव्रता वृन्दा थी नारी। कोऊ न सके पतिहि संहारी॥
तब जलन्धर ही भेष बनाई। वृन्दा ढिग हरि पहुच्यो जाई॥
शिव हित लही करि कपट प्रसंगा। कियो सतीत्व धर्म तोही भंगा॥
भयो जलन्धर कर संहारा। सुनी उर शोक उपारा॥
तिही क्षण दियो कपट हरि टारी। लखी वृन्दा दुःख गिरा उचारी॥
जलन्धर जस हत्यो अभीता। सोई रावन तस हरिही सीता॥
अस प्रस्तर सम ह्रदय तुम्हारा। धर्म खण्डी मम पतिहि संहारा॥
यही कारण लही श्राप हमारा। होवे तनु पाषाण तुम्हारा॥
सुनी हरि तुरतहि वचन उचारे। दियो श्राप बिना विचारे॥
लख्यो न निज करतूती पति को। छलन चह्यो जब पारवती को॥
जड़मति तुहु अस हो जड़रूपा। जग मह तुलसी विटप अनूपा॥
धग्व रूप हम शालिग्रामा। नदी गण्डकी बीच ललामा॥
जो तुलसी दल हमही चढ़ इहैं। सब सुख भोगी परम पद पईहै॥
बिनु तुलसी हरि जलत शरीरा। अतिशय उठत शीश उर पीरा॥
जो तुलसी दल हरि शिर धारत। सो सहस्त्र घट अमृत डारत॥
तुलसी हरि मन रञ्जनी हारी। रोग दोष दुःख भंजनी हारी॥
प्रेम सहित हरि भजन निरन्तर। तुलसी राधा में नाही अन्तर॥
व्यन्जन हो छप्पनहु प्रकारा। बिनु तुलसी दल न हरीहि प्यारा॥
सकल तीर्थ तुलसी तरु छाही। लहत मुक्ति जन संशय नाही॥
कवि सुन्दर इक हरि गुण गावत। तुलसिहि निकट सहसगुण पावत॥
बसत निकट दुर्बासा धामा। जो प्रयास ते पूर्व ललामा॥
पाठ करहि जो नित नर नारी। होही सुख भाषहि त्रिपुरारी॥
॥दोहा॥
तुलसी चालीसा पढ़ही तुलसी तरु ग्रह धारी।
दीपदान करि पुत्र फल पावही बन्ध्यहु नारी॥
सकल दुःख दरिद्र हरि हार ह्वै परम प्रसन्न।
आशिय धन जन लड़हि ग्रह बसही पूर्णा अत्र॥
लाही अभिमत फल जगत मह लाही पूर्ण सब काम।
जेई दल अर्पही तुलसी तंह सहस बसही हरीराम॥
तुलसी महिमा नाम लख तुलसी सूत सुखराम।
मानस चालीस रच्यो जग महं तुलसीदास॥
Shree Tulasi Chalisa in English:
॥Doha॥
Jai Jai Tulsi Bhagavati Satyavati Sukhdani।
Namo Namo Hari Preyasi Shri Vrinda Gun Khani॥
Shri Hari Shish Birajini, Dehu Amar Var Amb।
Janhit He Vrindavani Ab Na Karahu Vilamb॥
॥Chaupai॥
Dhanya Dhanya Shri Tulasi Mata। Mahima Agam Sada Shruti Gata॥
Hari Ke Pranahu Se Tum Pyari। Harihi Hetu Kinho Tap Bhaari॥
Jab Prasann Hai Darshan Dinhyo। Tab Kar Jori Vinay Us Kinhyo॥
He Bhagvant Kant Mam Hohu। Deen Jaani Jani Chhadahu Chhohu॥
Suni Lakshmi Tulasi Ki Baani। Dinho Shrap Kadh Par Aani॥
Us Ayogya Var Maangan Haari। Hohu Vitap Tum Jad Tanu Dhaari॥
Suni Tulasihi Shrapyo Tehim Thama। Karhu Vaas Tuhu Neechan Dhama॥
Diyo Vachan Hari Tab Tatkala। Sunahu Sumukhi Jani Hohu Bihala॥
Samay Paai Vhau Rau Paati Tora। Pujihau Aas Vachan Sat Mora॥
Tab Gokul Mah Gop Sudama। Taasu Bhai Tulasi Tu Bama॥
Krishna Raas Leela Ke Mahi। Radhe Shakyo Prem Lakhi Naahi॥
Diyo Shrap Tulasih Tatkala। Nar Lokahi Tum Janmahu Baala॥
Yo Gop Vah Danav Raja। Shankh Chud Naamak Shir Taja॥
Tulasi Bhai Tasu ki Naari। Param Sati Gun Roop Agari॥
As Dvai Kalp Bit Jab Gayaoo। Kalp Tritiya Janm Tab Bhayaoo॥
Vrinda Naam Bhayo Tulasi Ko। Asur Jalandhar Naam Pati Ko॥
Kari Ati Dvand Atul Baldhama। Linha Shankar Se Sangram॥
Ab Nij Sainy Sahit Shiv Haare। Marahi Na Tab Har Harihi Pukare॥
Pativrata Vrinda Thi Naari। Kou Na Sake Patihi Sanhari॥
Tab Jalandhar Hi Bhesh Banai। Vrinda Dhig Hari Pahuchyo Jaai॥
Shiv Hit Lahi Kari Kapat Prasanga। Kiyo Satitva Dharm Tohi Bhanga॥
Bhayo Jalandhar Kar Sanhara। Suni Ur Shok Upara॥
Tihi Kshan Diyo Kapat Hari Taari। Lakhi Vrinda Dukh Gira Uchari॥
Jalandhar Jas Hatyo Abhita। Soi Ravan Tas Harihi Sita॥
As Prastar Sam Hriday Tumhara। Dharm Khandi Mam Patihi Sanhara॥
Yahi Kaaran Lahi Shrap Hamara। Hove Tanu Pashan Tumhara॥
Suni Hari Turatahi Vachan Uchare। Diyo Shrap Bina Vichare॥
Lakhyo Na Nij Kartuti Pati Ko। Chhalan Chahyo Jab Parvati Ko॥
Jadmati Tuhu As Ho Jadroopa। Jag Mah Tulasi Vitap Anupa॥
Dhagv Roop Ham Shaligrama। Nadi Gandaki Bich Lalaama॥
Jo Tulasi Dal Hamhi Chadh Ihai। Sab Sukh Bhogi Param Pad Paihai॥
Binu Tulasi Hari Jalat Sharira। Atishay Uthat Shish Ur Peera॥
Jo Tulasi Dal Hari Shish Dhaarat। So Sahastra Ghat Amrit Daarat॥
Tulasi Hari Man Ranjani Haari। Rog Dosh Dukh Bhanjani Haari॥
Prem Sahit Hari Bhajan Nirantar। Tulasi Radha Me Naahi Antar॥
Vyanjan Ho Chhappanahu Prakara। Binu Tulasi Dal Na Harihi Pyara॥
Sakal Tirth Tulasi Taru Chhahi। Lahat Mukti Jan Sanshay Naahi॥
Kavi Sundar Ik Hari Gun Gaavat। Tulasihi Nikat Sahasgun Paavat॥
Basat Nikat Durbasa Dhama। Jo Prayas Te Purv Lalaama॥
Paath Karahi Jo Nit Nar Naari। Hohi Sukh Bhashahi Tripurari॥
॥Doha॥
Tulasi Chalisa Padhahi Tulasi Taru Grah Dhari।
Deepdaan Kari Putra Phal Pavahi Bandhyahu Naari॥
Sakal Dukh Daridra Hari Har Hvai Param Prasann।
Aashiya Dhan Jan Ladahi Grah Basahi Purna Atra॥
Laahi Abhimat Phal Jagat Mah Laahi Purna Sab Kaam।
Jei Dal Arpahi Tulasi Tah Sahas Basahi HariRam॥
Tulasi Mahima Naam lakh Tulasi Sut Sukhram।
Manas Chalis Rachyo Jag Mah Tulasidas॥
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Shree Shitala Chalisa

Shree Shitala Chalisa

॥दोहा॥
जय-जय माता शीतला, तुमहिं धरै जो ध्यान।
होय विमल शीतल हृदय, विकसै बुद्धि बलज्ञान॥
॥चौपाई॥
जय-जय-जय शीतला भवानी। जय जग जननि सकल गुणखानी॥
गृह-गृह शक्ति तुम्हारी राजित। पूरण शरदचन्द्र समसाजित॥
विस्फोटक से जलत शरीरा। शीतल करत हरत सब पीरा॥
मातु शीतला तव शुभनामा। सबके गाढ़े आवहिं कामा॥
शोकहरी शंकरी भवानी। बाल-प्राणरक्षी सुख दानी॥
शुचि मार्जनी कलश करराजै। मस्तक तेज सूर्य समराजै॥
चौसठ योगिन संग में गावैं। वीणा ताल मृदंग बजावै॥
नृत्य नाथ भैरो दिखरावैं। सहज शेष शिव पार ना पावैं॥
धन्य-धन्य धात्री महारानी। सुरनर मुनि तब सुयश बखानी॥
ज्वाला रूप महा बलकारी। दैत्य एक विस्फोटक भारी॥
घर-घर प्रविशत कोई न रक्षत। रोग रूप धरि बालक भक्षत॥
हाहाकार मच्यो जगभारी। सक्यो न जब संकट टारी॥
तब मैया धरि अद्भुत रूपा। करमें लिये मार्जनी सूपा॥
विस्फोटकहिं पकड़ि कर लीन्ह्यो। मुसल प्रहार बहुविधि कीन्ह्यो॥
बहुत प्रकार वह विनती कीन्हा। मैया नहीं भल मैं कछु चीन्हा॥
अबनहिं मातु, काहुगृह जइहौं। जहँ अपवित्र सकल दुःख हरिहौं॥
भभकत तन, शीतल ह्वै जइहैं। विस्फोटक भयघोर नसइहैं॥
श्री शीतलहिं भजे कल्याना। वचन सत्य भाषे भगवाना॥
विस्फोटक भय जिहि गृह भाई। भजै देवि कहँ यही उपाई॥
कलश शीतला का सजवावै। द्विज से विधिवत पाठ करावै॥
तुम्हीं शीतला, जग की माता। तुम्हीं पिता जग की सुखदाता॥
तुम्हीं जगद्धात्री सुखसेवी। नमो नमामि शीतले देवी॥
नमो सुक्खकरणी दुःखहरणी। नमो-नमो जगतारणि तरणी॥
नमो-नमो त्रैलोक्य वन्दिनी। दुखदारिद्रादिक कन्दिनी॥
श्री शीतला, शेढ़ला, महला। रुणलीह्युणनी मातु मंदला॥
हो तुम दिगम्बर तनुधारी। शोभित पंचनाम असवारी॥
रासभ, खर बैशाख सुनन्दन। गर्दभ दुर्वाकंद निकन्दन॥
सुमिरत संग शीतला माई। जाहि सकल दुख दूर पराई॥
गलका, गलगन्डादि जुहोई। ताकर मंत्र न औषधि कोई॥
एक मातु जी का आराधन। और नहिं कोई है साधन॥
निश्चय मातु शरण जो आवै। निर्भय मन इच्छित फल पावै॥
कोढ़ी, निर्मल काया धारै। अन्धा, दृग-निज दृष्टि निहारै॥
वन्ध्या नारि पुत्र को पावै। जन्म दरिद्र धनी होई जावै॥
मातु शीतला के गुण गावत। लखा मूक को छन्द बनावत॥
यामे कोई करै जनि शंका। जग मे मैया का ही डंका॥
भनत रामसुन्दर प्रभुदासा। तट प्रयाग से पूरब पासा॥
पुरी तिवारी मोर निवासा। ककरा गंगा तट दुर्वासा॥
अब विलम्ब मैं तोहि पुकारत। मातु कृपा कौ बाट निहारत॥
पड़ा क्षर तव आस लगाई। रक्षा करहु शीतला माई॥
॥दोहा॥
घट-घट वासी शीतला, शीतल प्रभा तुम्हार।
शीतल छइयां में झुलई, मइया पलना डार॥
Shri Shitala Chalisa in English:
॥Doha॥
Jai-Jai Mata Shitala, Tumahin Dharai Jo Dhyana।
Hoya Vimal Shital Hridaya, Vikasai Buddhi Balagyana॥
॥Chaupai॥
Jai-Jai-Jai Shitala Bhawani। Jai Jaga Janani Sakala Gunakhani॥
Griha-Griha Shakti Tumhari Rajita। Purana Sharadachandra Samasajita॥
Visphotaka Se Jalata Sharira। Shital Karata Harata Saba Pira॥
Matu Shitala Tava Shubhanama। Sabake Gadhen Avahin Kama॥
Shokahari Shankari Bhawani। Bala-Pranarakshi Sukha Dani॥
Shuchi Marjani Kalasha Kararajai। Mastaka Teja Surya Samarajai॥
Chausatha Yogina Sanga Me Gavain। Vina Tala Mridanga Bajavai॥
Nritya Natha Bhairo Dikharavain। Sahaja Shesha Shiva Para Na Pavain॥
Dhanya-Dhanya Dhatri Maharani। Suranara Muni Taba Suyasha Bakhani॥
Jwala Rupa Maha Balakari। Daitya Eka Visphotaka Bhari॥
Ghar-Ghar Pravishata Koi Na Rakshata। Roga Rupa Dhari Balaka Bhakshata॥
Hahakara Machyo Jagabhari। Sakyo Na Jaba Sankata Tari॥
Taba Maiya Dhari Adbhuta Rupa। Karamen Liye Marjani Supa॥
Visphotakahin Pakadin Kar Linhyo। Musala Prahara Bahuvidhi Kinhyo॥
Bahuta Prakara Vaha Vinati Kinha। Maiya Nahin Bhala Main Kachhu Chinha॥
Abanahin Matu, Kahugriha Jaihaun। Jahan Apavitra Sakala Dukha Harihaun॥
Bhabhakata Tana, Shital Hvai Jaihain। Visphotaka Bhayaghora Nasaihain॥
Shri Shitalahin Bhaje Kalyana। Vachana Satya Bhashe Bhagawana॥
Visphotaka Bhaya Jihi Griha Bhai। Bhajai Devi Kahan Yahi Upai॥
Kalasha Shitala Ka Sajavavai। Dwija Se Vidhiwata Patha Karavai॥
Tumhin Shitala, Jaga Ki Mata। Tumhin Pita Jaga Ki Sukhadata॥
Tumhin Jagaddhatri Sukhasevi। Namo Namami Shitale Devi॥
Namo Sukkhakarani Dukhaharani। Namo-Namo Jagatarani Tarani॥
Namo-Namo Trailokya Vandini। Dukhadaridradika Kandini॥
Shri Shitala, Shedhala, Mahala। Runalihyunani Matu Mandala॥
Ho Tuma Digambara Tanudhari। Shobhita Panchanama Asawari॥
Rasabha, Khara Baishakha Sunandana। Gardabha Durvakanda Nikandana॥
Sumirata Sanga Shitala Mai। Jahi Sakala Dukha Dura Parai॥
Galaka, Galagandadi Juhoi। Takara Mantra Na Aushadhi Koi॥
Eka Matu Ji Ka Aradhana। Aura Nahin Koi Hai Sadhana॥
Nishchaya Matu Sharana Jo Avai। Nirbhaya Man Ichchhita Phala Pavai॥
Kodhi, Nirmala Kaya Dharai। Andha, Driga-Nija Drishti Niharai॥
Vandhya Nari Putra Ko Pavai। Janma Daridra Dhani Hoi Javai॥
Matu Shitala Ke Guna Gavata। Lakha Muka Ko Chhanda Banawata॥
Yame Koi Karai Jani Shanka। Jaga Me Maiya Ka Hi Danka॥
Bhanata Ramasundara Prabhudasa। Tat Prayaga Se Puraba Pasa॥
Puri Tiwari Mora Nivasa। Kakara Ganga Tat Durvasa॥
Aba Vilamba Main Tohi Pukarata। Matu Kripa Kau Bata Niharata॥
Pada Kshara Tava Asa Lagai। Raksha Karahu Shitala Mai॥
॥Doha॥
Ghat-Ghat Vasi Shitala, Shital Prabha Tumhara।
Shital Chhaiyan Me Jhulai, Maiya Palana Dara॥
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Shree Ganga Chalisa

Shree Ganga Chalisa 

॥दोहा॥
जय जय जय जग पावनी, जयति देवसरि गंग।
जय शिव जटा निवासिनी, अनुपम तुंग तरंग॥
॥चौपाई॥
जय जय जननी हराना अघखानी। आनंद करनी गंगा महारानी॥
जय भगीरथी सुरसरि माता। कलिमल मूल डालिनी विख्याता॥
जय जय जहानु सुता अघ हनानी। भीष्म की माता जगा जननी॥
धवल कमल दल मम तनु सजे। लखी शत शरद चंद्र छवि लजाई॥
वहां मकर विमल शुची सोहें। अमिया कलश कर लखी मन मोहें॥
जदिता रत्ना कंचन आभूषण। हिय मणि हर, हरानितम दूषण॥
जग पावनी त्रय ताप नासवनी। तरल तरंग तुंग मन भावनी॥
जो गणपति अति पूज्य प्रधान। इहूं ते प्रथम गंगा अस्नाना॥
ब्रह्मा कमंडल वासिनी देवी। श्री प्रभु पद पंकज सुख सेवि॥
साथी सहस्त्र सागर सुत तरयो। गंगा सागर तीरथ धरयो॥
अगम तरंग उठ्यो मन भवन। लखी तीरथ हरिद्वार सुहावन॥
तीरथ राज प्रयाग अक्षैवेता। धरयो मातु पुनि काशी करवत॥
धनी धनी सुरसरि स्वर्ग की सीधी। तरनी अमिता पितु पड़ पिरही॥
भागीरथी ताप कियो उपारा। दियो ब्रह्म तव सुरसरि धारा॥
जब जग जननी चल्यो हहराई। शम्भु जाता महं रह्यो समाई॥
वर्षा पर्यंत गंगा महारानी। रहीं शम्भू के जाता भुलानी॥
पुनि भागीरथी शम्भुहीं ध्यायो। तब इक बूंद जटा से पायो॥
ताते मातु भें त्रय धारा। मृत्यु लोक, नाभा, अरु पातारा॥
गईं पाताल प्रभावती नामा। मन्दाकिनी गई गगन ललामा॥
मृत्यु लोक जाह्नवी सुहावनी। कलिमल हरनी अगम जग पावनि॥
धनि मइया तब महिमा भारी। धर्मं धुरी कलि कलुष कुठारी॥
मातु प्रभवति धनि मंदाकिनी। धनि सुर सरित सकल भयनासिनी॥
पन करत निर्मल गंगा जल। पावत मन इच्छित अनंत फल॥
पुरव जन्म पुण्य जब जागत। तबहीं ध्यान गंगा महं लागत॥
जई पगु सुरसरी हेतु उठावही। तई जगि अश्वमेघ फल पावहि॥
महा पतित जिन कहू न तारे। तिन तारे इक नाम तिहारे॥
शत योजन हूं से जो ध्यावहिं। निशचाई विष्णु लोक पद पावहीं॥
नाम भजत अगणित अघ नाशै। विमल ज्ञान बल बुद्धि प्रकाशे॥
जिमी धन मूल धर्मं अरु दाना। धर्मं मूल गंगाजल पाना॥
तब गुन गुणन करत दुख भाजत। गृह गृह सम्पति सुमति विराजत॥
गंगहि नेम सहित नित ध्यावत। दुर्जनहूं सज्जन पद पावत॥
उद्दिहिन विद्या बल पावै। रोगी रोग मुक्त हवे जावै॥
गंगा गंगा जो नर कहहीं। भूखा नंगा कभुहुह न रहहि॥
निकसत ही मुख गंगा माई। श्रवण दाबी यम चलहिं पराई॥
महं अघिन अधमन कहं तारे। भए नरका के बंद किवारें॥
जो नर जपी गंग शत नामा। सकल सिद्धि पूरण ह्वै कामा॥
सब सुख भोग परम पद पावहीं। आवागमन रहित ह्वै जावहीं॥
धनि मइया सुरसरि सुख दैनि। धनि धनि तीरथ राज त्रिवेणी॥
ककरा ग्राम ऋषि दुर्वासा। सुन्दरदास गंगा कर दासा॥
जो यह पढ़े गंगा चालीसा। मिली भक्ति अविरल वागीसा॥
॥दोहा॥
नित नए सुख सम्पति लहैं। धरें गंगा का ध्यान।
अंत समाई सुर पुर बसल। सदर बैठी विमान॥
संवत भुत नभ्दिशी। राम जन्म दिन चैत्र।
पूरण चालीसा किया। हरी भक्तन हित नेत्र॥
Shree Ganga Chalisa in English:
||DOHA||
Jai jai jai jag pavani, jayati devasari Ganga,
Jai Shiv jata nivasini, anupam tung taranga
||Chaupai||
Jai jai janani harana aghkhani, anand karani Ganga Maharani
Jai Bhagirath surasuri mata, kalimal mul dalani nikhyata
Jai Jai jahanu suta agh hanani, Bhishma ki mata jaga janani
Dhaval kamal dal mam tanu saje, lakhi shat sharad chandra chhavi lajai
Vahan makar vimal shuchi sohain, amiya kalash kar lakhi man mohain
Jadita ratna kanchan abhushan, hiya mani har, haranitam dushan
Jag pavani traya tap nasavani, taral tarang tunga mana bhavani
Jo Ganapati ati pujya pradhana, ihun te pratham Ganga asnana
Brahma kamandal vasini devi, Shri Prabhu pad pankaj sukh sevi
Sathi sahastra Sagar sut taryo, Ganga sagar tirth dharyo
Agam tarang uthyo man bhavan, lakhi tirth Haridvar suhavan
Tirth raj prayag Akshaiveta, dharyo matu puni kashi karvat
Dhani dhani surasari svarga ki sidhi, tarani amita pitu pad pirhi
Bhagirathi tap kiyo upara, diyo Brahma tava surasari dhara
Jaba jag jagani chalyo haharai, Shambhu jata mahon rahyo samai
Barsha paryant Ganga Maharani, rahin shambhu ke jata bhulani
Puni Bhagirathi shambhuhin dhyayo, taba ika band jata se payo
Tate matu bhain traya dhara, mrityu lok, nabha, aru patara
Gain patal Prabhavati, nama, Mandakini gai gagan lelama
Mrityu lok jahnavi suhavani, kalimal harani agam jag pa vani
Dhani maiya tab mahima bhari, dharma dhuri kali kalush kuthari
Matu Prabhavati Dhani Mandakini, dhani sur sarith sakal bhainasini
Pan karat nirmal Ganga jal, pavat man ichchhit anant phal
Purva janma punya jaba jagat, tabahin dhyan Ganga mahan lagat
Jai pagu sursari hetu uthavahi, tai jagi ashva megha phal pavahi
Maha patit jin kahu na tare, tin tare ik nam tihare
Shat yojanahun se jo dhyavahin, nishchai vishnu lok pad pavahin
Nam bhajat aganit agh na shai, vimal gyan bal budhi prakashai
Jimi dhan mula dharma aru dana, dharma mula Ganga jal pana
Taba gun gunan karat dukh bhajat, griha griha smapati sumati virajat
Gangahi nem sahit nit dhyavat, duraj nahun sajjan pad pavat
Buddihin vidhya bal pavai, rogi rog mukta hvai javai
Ganga Ganga jo nara kahahin, bhukha nanga kabhuhuh na rahahi
Niksat hi mukh Ganga mahi, shravana dabi Yama chalahin parai
Mahan aghin adhman kahan tare, bhae narka ke bande kivaren
Jo nar japai Ganga shat nama, sakal siddhi puran hvai kama
Sab sukh bhog param pad pavahir, avagaman rahit hvai javahin
Dhani maiya surasari sukhdaini, dhani dhani tirath raj Tniveni
Kakara gram rishi Durvasa, Sundardas Gang kar dasa
Jo yah padhe Ganga chalisa, milai bhakti aviral vagisa
||DOHA||
Nit nay sukh sampati Iahain, dharen ganga ka dhyan
Anta samai sur pur basai, saadar baithi viman
Samvat bhuj nabhdishi,ram janam din chaitra
Puran Chalisa kiya, Hari bhaktan hit naitra.
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Shree Gayatri Chalisa

Shree Gayatri Chalisa

॥दोहा॥

!!  ह्रीं श्रीं क्लीं मेधा प्रभा जीवन ज्योति प्रचण्ड,

शान्ति कान्ति जागृत प्रगति रचना शक्ति अखण्ड,

जगत जननी मङ्गल करनि गायत्री सुखधाम,

  प्रणवों सावित्री स्वधा स्वाहा पूरन काम !!

॥चौपाई॥

!!  भूर्भुवः स्वः ॐ युत जननी,

गायत्री नित कलिमल दहनी,

अक्षर चौविस परम पुनीता,

इनमें बसें शास्त्र श्रुति गीता !!

!!  शाश्वत सतोगुणी सत रूपा,

सत्य सनातन सुधा अनूपा,

हंसारूढ सितंबर धारी,

स्वर्ण कान्ति शुचि गगन- बिहारी !!

!!  पुस्तक पुष्प कमण्डलु माला,

शुभ्र वर्ण तनु नयन विशाला,

ध्यान धरत पुलकित हित होई,

सुख उपजत दुःख दुर्मति खोई !!

!!  कामधेनु तुम सुर तरु छाया,

निराकार की अद्भुत माया,

तुम्हरी शरण गहै जो कोई,

तरै सकल संकट सों सोई !!

!!  सरस्वती लक्ष्मी तुम काली,

दिपै तुम्हारी ज्योति निराली,

तुम्हरी महिमा पार न पावैं,

जो शारद शत मुख गुन गावैं !!

!!  चार वेद की मात पुनीता,

तुम ब्रह्माणी गौरी सीता,

महामन्त्र जितने जग माहीं,

कोउ गायत्री सम नाहीं !!

!!  सुमिरत हिय में ज्ञान प्रकासै,

आलस पाप अविद्या नासै,

सृष्टि बीज जग जननि भवानी,

कालरात्रि वरदा कल्याणी !!

!!  ब्रह्मा विष्णु रुद्र सुर जेते,

तुम सों पावें सुरता तेते,

तुम भक्तन की भक्त तुम्हारे,

जननिहिं पुत्र प्राण ते प्यारे !!

!!  महिमा अपरम्पार तुम्हारी,

जय जय जय त्रिपदा भयहारी,

पूरित सकल ज्ञान विज्ञाना,

तुम सम अधिक न जगमे आना !!

!!  तुमहिं जानि कछु रहै न शेषा,

तुमहिं पाय कछु रहै न क्लेसा,

जानत तुमहिं तुमहिं व्है जाई,

पारस परसि कुधातु सुहाई !!

!!  तुम्हरी शक्ति दिपै सब ठाई,

माता तुम सब ठौर समाई,

ग्रह नक्षत्र ब्रह्माण्ड घनेरे,

सब गतिवान तुम्हारे प्रेरे !!

!!  सकल सृष्टि की प्राण विधाता,

पालक पोषक नाशक त्राता,

मातेश्वरी दया व्रत धारी,

तुम सन तरे पातकी भारी !!

!!  जापर कृपा तुम्हारी होई,

तापर कृपा करें सब कोई,

मंद बुद्धि ते बुधि बल पावें,

रोगी रोग रहित हो जावें !!

!!  दरिद्र मिटै कटै सब पीरा,

नाशै दुःख हरै भव भीरा,

गृह क्लेश चित चिन्ता भारी,

नासै गायत्री भय हारी !!

!!  सन्तति हीन सुसन्तति पावें,

सुख संपति युत मोद मनावें,

भूत पिशाच सबै भय खावें,

यम के दूत निकट नहिं आवें !!

!!  जो सधवा सुमिरें चित लाई,

अछत सुहाग सदा सुखदाई,

घर वर सुख प्रद लहैं कुमारी,

विधवा रहें सत्य व्रत धारी  !!

!!  जयति जयति जगदंब भवानी,

तुम सम ओर दयालु न दानी,

जो सतगुरु सो दीक्षा पावे,

सो साधन को सफल बनावे !!

!!  सुमिरन करे सुरूचि बडभागी,

लहै मनोरथ गृही विरागी,

अष्ट सिद्धि नवनिधि की दाता,

सब समर्थ गायत्री माता !!

!!  ऋषि मुनि यती तपस्वी योगी,

सो सो मन वांछित फल पावें,

बल बुधि विद्या शील स्वभाउ,

धन वैभव यश तेज उछाउ !!

!! सकल बढें उपजें सुख नाना

जे यह पाठ करै धरि ध्याना !!

||दोहा||

!! यह चालीसा भक्ति युत पाठ करे जो कोई

तापार कृपा प्रसंता गायत्री की होय  !!

Shree Gayatri Chalisa In English:

||Dohaa||

!!  Hreem shreem kleem megha prabha jevan jyoti prachand,

Shanti kranti, jagruti, pragati, rachana, shakti akhand,

Jagat janni mandal, karni gayatri sukhdham,  .

 Pranvom savitri swadha, swaha puran kam. !!

||Chopayi||

!!  Aum bhur bhuvah swah yut janni,

gayatri nitt kalimal dehani,

Akshar chaubis param punita,

inmen base shastra shruti geeta.!!

!!  Shashwat satoguni satrupa,

satya sanatan sudha anupa.

Hansarodha sitamber dhari,

swarn kanti shuchi gagan bihari. !!

!! Pustak pushp kamandalu mala, shubh,

varn tanu nain vishala,

Dheyan dharat pulkit hit koi,

sukh upjat dukh durmati khoi !!

!!  Kamdhenu tum sur taru chhaya,

nirakar ki adbhut maya.

Tumhari sharan gahe jo ko,

tarai sakal sankata so soi. !!

!!  Saraswati lakshmi tum kali,

dipe tumhari jyoti nirali.

Tumhari mahima para na pave,

jo sharad shat mukh gunn gave. !!

!! Char ved ki maat punita,

tum brahmani gauri gita,

Maha mantra jitne jag mahi,

kou gayatri sam nahi. !!

!!  Sumirat hiye mein gyan prakashe,

alas pap avidya nase.

Srishti beej jag janni bhawani,

kal ratari varada kalyani. !!

!! Brahma vishnu rudr sur jaite,

tum so pave surta tete,

Tum bhagatan ke bhagat tumhare,

janihi putr te pyare. !!

!!  Mahima aprampar tumhari,

jai jai tripda bhaehari.

Purit sakal gyan vigyana,

tum sam adhik na jag mein ana.!!

!! Tumahin jaan kachhu rahe na shesha,

tumahin paye kachu rahe na kalesa,

Janant tumahi tumahi vahe jayi,

paras paris kudhatu suhai. !!

!!  Tumhari shakti dipe sab thai,

mata tum sab thor samai,

Greh nakshatra bhramand ghanere,

sub gativan tumhare prere. !!

!! Sakal shrishti praan vidhata,

palak poshak nashak trata,

Mateshwari deya vart dhari,

tum san tare pataki bhari. !!

!!  Japar kripa tumhari ho,

tapar kripa kare sab koi.

Mand buddhi te buddhi bal pave,

rogi rog rahit ho jave !!

!! Daridra mite kate sub pira,

nashe dukh hare bhav bhira,

Greh kalesh chitt chinta bhari,

nase gayatri bhay hari. !!

!!  Santati heen susantati pave,

sukh sampati yut mod manave,

Bhoot pishach sabe bhay khave

yam ke doot nikat nahi aave !!.

!! Jo sadhav sumire chit, laai,

akshayat suhag sada sukhdai.

Ghar var sukh prad lahe kumari,

vidhava rahay satya vrata dhari. !!

!!  Jayati jayati jagadamb bhavani,

tum sam aur deyalu na daani,

Jo satguru so diksha pave,

so sadhan ko safal banave !!

!! Sumiran kare suruchi badbhagi,

lahe manorath grehi viragi.

Asht sidhi nav nidhi ki data,

saba samarath gayatri mata. !!

!!  Rishi munni yati tapasvi jogi,

so so mann vanchhit phal pave,

Bal buddhi vidya sheel swbhau,

dhan vaibhav yash tej uchhau.!!

!! Sakal badhe upje sukh nana,

jo yah path kare dhari dheyana. !!

|| Dohaa ||

!!  Yaha chalisa bhagati yut,

path kare jo koi,

Tapar kripa parsanata,

gayatri ki hoe. !!

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Shree Surya Deva Chalisa

Shree Surya Deva Chalisa

॥दोहा॥
कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग।
पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग॥
॥चौपाई॥
जय सविता जय जयति दिवाकर!। सहस्रांशु! सप्ताश्व तिमिरहर॥
भानु! पतंग! मरीची! भास्कर!। सविता हंस! सुनूर विभाकर॥
विवस्वान! आदित्य! विकर्तन। मार्तण्ड हरिरूप विरोचन॥
अम्बरमणि! खग! रवि कहलाते। वेद हिरण्यगर्भ कह गाते॥
सहस्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि। मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि॥
अरुण सदृश सारथी मनोहर। हांकत हय साता चढ़ि रथ पर॥
मंडल की महिमा अति न्यारी। तेज रूप केरी बलिहारी॥
उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते। देखि पुरन्दर लज्जित होते॥
मित्र मरीचि भानु अरुण भास्कर। सविता सूर्य अर्क खग कलिकर॥
पूषा रवि आदित्य नाम लै। हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै॥
द्वादस नाम प्रेम सों गावैं। मस्तक बारह बार नवावैं॥
चार पदारथ जन सो पावै। दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै॥
नमस्कार को चमत्कार यह। विधि हरिहर को कृपासार यह॥
सेवै भानु तुमहिं मन लाई। अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई॥
बारह नाम उच्चारन करते। सहस जनम के पातक टरते॥
उपाख्यान जो करते तवजन। रिपु सों जमलहते सोतेहि छन॥
धन सुत जुत परिवार बढ़तु है। प्रबल मोह को फंद कटतु है॥
अर्क शीश को रक्षा करते। रवि ललाट पर नित्य बिहरते॥
सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत। कर्ण देस पर दिनकर छाजत॥
भानु नासिका वासकरहुनित। भास्कर करत सदा मुखको हित॥
ओंठ रहैं पर्जन्य हमारे। रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे॥
कंठ सुवर्ण रेत की शोभा। तिग्म तेजसः कांधे लोभा॥
पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर। त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर॥
युगल हाथ पर रक्षा कारन। भानुमान उरसर्म सुउदरचन॥
बसत नाभि आदित्य मनोहर। कटिमंह, रहत मन मुदभर॥
जंघा गोपति सविता बासा। गुप्त दिवाकर करत हुलासा॥
विवस्वान पद की रखवारी। बाहर बसते नित तम हारी॥
सहस्रांशु सर्वांग सम्हारै। रक्षा कवच विचित्र विचारे॥
अस जोजन अपने मन माहीं। भय जगबीच करहुं तेहि नाहीं ॥
दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै। जोजन याको मन मंह जापै॥
अंधकार जग का जो हरता। नव प्रकाश से आनन्द भरता॥
ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही। कोटि बार मैं प्रनवौं ताही॥
मंद सदृश सुत जग में जाके। धर्मराज सम अद्भुत बांके॥
धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा। किया करत सुरमुनि नर सेवा॥
भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों। दूर हटतसो भवके भ्रम सों॥
परम धन्य सों नर तनधारी। हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी॥
अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन। मधु वेदांग नाम रवि उदयन॥
भानु उदय बैसाख गिनावै। ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै॥
यम भादों आश्विन हिमरेता। कातिक होत दिवाकर नेता॥
अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं। पुरुष नाम रवि हैं मलमासहिं॥
॥दोहा॥
भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य।
सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य॥
Shree Surya Deva Chalisa in English: 
॥Doha॥
Kanaka Badana Kundala Makara, Mukta Mala Anga।
Padmasana Sthita Dhyaie, Shankha Chakra Ke Sanga॥
॥Chaupai॥
Jai Savita Jai Jayati Divakara!। Sahasranshu! Saptashva Timirahara॥
Bhanu! Patanga! Marichi! Bhaskara!। Savita Hansa! Sunura Vibhakara॥
Vivaswana! Aditya! Vikartana। Martanda Harirupa Virochana॥
Ambaramani! Khaga! Ravi Kahalate। Veda Hiranyagarbha Kaha Gate॥
Sahasranshu Pradyotana, Kahikahi। Munigana Hota Prasanna Modalahi॥
Aruna Sadrisha Sarathi Manohara। Hankata Haya Sata Chadi Ratha Para॥
Mandala Ki Mahima Ati Nyari। Teja Rupa Keri Balihari॥
Uchchaihshrava Sadrisha Haya Jote। Dekhi Purandara Lajjita Hote॥
Mitra Marichi Bhanu Aruna Bhaskara। Savita Surya Arka Khaga Kalikara॥
Pusha Ravi Aditya Nama Lai। Hiranyagarbhaya Namah Kahikai॥
Dwadasa Nama Prema So Gavain। Mastaka Baraha Bara Navavain॥
Chara Padaratha Jana So Pavai। Dukha Daridra Agha Punja Nasavai॥
Namaskara Ko Chamatkara Yaha। Vidhi Harihara Ko Kripasara Yaha॥
Sevai Bhanu Tumahin Mana Lai। Ashtasiddhi Navanidhi Tehin Pai॥
Baraha Nama Uchcharana Karate। Sahasa Janama Ke Pataka Tarate॥
Upakhyana Jo Karate Tavajana। Ripu So Jamalahate Sotehi Chhana॥
Dhana Suta Juta Parivara Badhatu Hai। Prabala Moha Ko Phanda Katatu Hai॥
Arka Shisha Ko Raksha Karate। Ravi Lalata Para Nitya Biharate॥
Surya Netra Para Nitya Virajata। Karna Desa Para Dinakara Chhajata॥
Bhanu Nasika Vasakarahunita। Bhaskara Karata Sada Mukhako Hita॥
Ontha Rahai Parjanya Hamare। Rasana Bicha Tikshna Basa Pyare॥
Kantha Suvarna Reta Ki Shobha। Tigma Tejasah Kandhe Lobha॥
Pusham Bahu Mitra Pithahin Para। Tvashta Varuna Rahata Su-Ushnakara॥
Yugala Hatha Para Raksha Karana। Bhanumana Urasarma Su-Udarachana॥
Basata Nabhi Aditya Manohara। Katimanha, Rahata Mana Mudabhara॥
Jangha Gopati Savita Basa। Gupta Divakara Karata Hulasa॥
Vivaswana Pada Ki Rakhavari। Bahara Basate Nita Tam Hari॥
Sahasranshu Sarvanga Samharai। Raksha Kavacha Vichitra Vichare॥
Asa Jojana Apane Mana Mahi। Bhaya Jagabicha Karahun Tehi Nahi॥
Dadru Kushtha Tehi Kabahu Na Vyapai। Jojana Yako Mana Manha Japai॥
Andhakara Jaga Ka Jo Harata। Nava Prakasha Se Ananda Bharata॥
Graha Gana Grasi Na Mitavata Jahi। Koti Bara Main Pranavaun Tahi॥
Manda Sadrisha Suta Jaga Me Jake। Dharmaraja Sam Adbhuta Banke॥
Dhanya-Dhanya Tuma Dinamani Deva। Kiya Karata Suramuni Nara Seva॥
Bhakti Bhavayuta Purna Niyam So। Dura Hatataso Bhavake Bhrama So॥
Parama Dhanya So Nara Tanadhari। Hain Prasanna Jehi Para Tama Hari॥
Aruna Magha Mahan Surya Phalguna। Madhu Vedanga Nama Ravi Udayana॥
Bhanu Udaya Baisakha Ginavai। Jyeshtha Indra Ashadha Ravi Gavai॥
Yama Bhado Ashwin Himareta। Katika Hota Divakara Neta॥
Agahana Bhinna Vishnu Hain Pusahin। Purusha Nama Ravi Hain Malamasahin॥
॥Doha॥
Bhanu Chalisa Prema Yuta, Gavahin Je Nar Nitya।
Sukha Sampatti Lahi Bibidha, Honhi Sada Kritakritya॥
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Shree Krishna Chalisa

Shree Krishna Chalisa 

॥दोहा॥
बंशी शोभित कर मधुर, नील जलद तन श्याम।
अरुण अधर जनु बिम्बा फल, नयन कमल अभिराम॥
पूर्ण इन्द्र, अरविन्द मुख, पिताम्बर शुभ साज।
जय मनमोहन मदन छवि, कृष्णचन्द्र महाराज॥
॥चौपाई॥
जय यदुनन्दन जय जगवन्दन। जय वसुदेव देवकी नन्दन॥
जय यशुदा सुत नन्द दुलारे। जय प्रभु भक्तन के दृग तारे॥
जय नट-नागर नाग नथैया। कृष्ण कन्हैया धेनु चरैया॥
पुनि नख पर प्रभु गिरिवर धारो। आओ दीनन कष्ट निवारो॥
वंशी मधुर अधर धरी तेरी। होवे पूर्ण मनोरथ मेरो॥
आओ हरि पुनि माखन चाखो। आज लाज भारत की राखो॥
गोल कपोल, चिबुक अरुणारे। मृदु मुस्कान मोहिनी डारे॥
रंजित राजिव नयन विशाला। मोर मुकुट वैजयंती माला॥
कुण्डल श्रवण पीतपट आछे। कटि किंकणी काछन काछे॥
नील जलज सुन्दर तनु सोहे। छवि लखि, सुर नर मुनिमन मोहे॥
मस्तक तिलक, अलक घुंघराले। आओ कृष्ण बांसुरी वाले॥
करि पय पान, पुतनहि तारयो। अका बका कागासुर मारयो॥
मधुवन जलत अग्नि जब ज्वाला। भै शीतल, लखितहिं नन्दलाला॥
सुरपति जब ब्रज चढ़यो रिसाई। मसूर धार वारि वर्षाई॥
लगत-लगत ब्रज चहन बहायो। गोवर्धन नखधारि बचायो॥
लखि यसुदा मन भ्रम अधिकाई। मुख महं चौदह भुवन दिखाई॥
दुष्ट कंस अति उधम मचायो। कोटि कमल जब फूल मंगायो॥
नाथि कालियहिं तब तुम लीन्हें। चरणचिन्ह दै निर्भय किन्हें॥
करि गोपिन संग रास विलासा। सबकी पूरण करी अभिलाषा॥
केतिक महा असुर संहारयो। कंसहि केस पकड़ि दै मारयो॥
मात-पिता की बन्दि छुड़ाई। उग्रसेन कहं राज दिलाई॥
महि से मृतक छहों सुत लायो। मातु देवकी शोक मिटायो॥
भौमासुर मुर दैत्य संहारी। लाये षट दश सहसकुमारी॥
दै भिन्हीं तृण चीर सहारा। जरासिंधु राक्षस कहं मारा॥
असुर बकासुर आदिक मारयो। भक्तन के तब कष्ट निवारियो॥
दीन सुदामा के दुःख टारयो। तंदुल तीन मूंठ मुख डारयो॥
प्रेम के साग विदुर घर मांगे। दुर्योधन के मेवा त्यागे॥
लखि प्रेम की महिमा भारी। ऐसे श्याम दीन हितकारी॥
भारत के पारथ रथ हांके। लिए चक्र कर नहिं बल ताके॥
निज गीता के ज्ञान सुनाये। भक्तन ह्रदय सुधा वर्षाये॥
मीरा थी ऐसी मतवाली। विष पी गई बजाकर ताली॥
राना भेजा सांप पिटारी। शालिग्राम बने बनवारी॥
निज माया तुम विधिहिं दिखायो। उर ते संशय सकल मिटायो॥
तब शत निन्दा करी तत्काला। जीवन मुक्त भयो शिशुपाला॥
जबहिं द्रौपदी टेर लगाई। दीनानाथ लाज अब जाई॥
तुरतहिं वसन बने ननन्दलाला। बढ़े चीर भै अरि मुँह काला॥
अस नाथ के नाथ कन्हैया। डूबत भंवर बचावत नैया॥
“सुन्दरदास” आस उर धारी। दयादृष्टि कीजै बनवारी॥
नाथ सकल मम कुमति निवारो। क्षमहु बेगि अपराध हमारो॥
खोलो पट अब दर्शन दीजै। बोलो कृष्ण कन्हैया की जै॥
॥दोहा॥
यह चालीसा कृष्ण का, पाठ करै उर धारि।
अष्ट सिद्धि नवनिधि फल, लहै पदारथ चारि॥
Shree Krishna Chalisa in English:
||Doha||
Banshi shobhit kar madhur, nil jalaj tanu shyam.
Arun adhar janu bimba phal, nayan kamal abhiram.
Puran Indu Arvind mukh, pitambar suchi saj.
Jai Man Mohan Madan chhavi,Krishiaachandra maharaj.
||Chaupai||
Jai jai Yadunandan jai jag vandan. Jai Vasudev Devki nandan.
Jai Yashoda sut Nandadulare. Jai prabhu bhaktan ke rakhvare.
Jai Natanagar Nag nathaiya. Krishna Kanhaiya dhenu charaiya.
Puni nakh par Prabhu Girivar dharo. Ao dinan-kasht nivaro.
Banshi madhur adhar-dhari tero. Hove puran manorath mero.
Ao Harli puni makhan chakho. Aaj laj bhaktan ki rakho.
Gol kapol chibuk arunare. Mridu muskan mohini dare.
Rajit Rajiv nayan vishala. Mor mukut vaijantimala.
Kundal shravan pit pat achhe. Kati kinkini kachhani kachhe.
Nil jalaj sundar tan sohai. Chhavi lakhi sur nar muni man mohai.
Mastak tilak alak ghunghrale. Ao Shyam bansuriya vale.
Kari pai pan putanahin taryo. Aka-baka kagasur maryo.
Madhuvan jalat agin jab jvala. Bhe shital lakhatahin Nandaiala.
Jab surpati Brij chadhyo risai. Musar dhar bari barsai.
Lakhat lakhat Bnij chahat bahayo. Govardhan nakh dhari bachayo.
Lakhi Yashuda man bhram adhikai. Mukh mahan chaudah bhuvan dikhai.
Dusht Kansa ati udham machayo. Koti kamal kahan phul mangayo.
Nathi kaiiyahin ko tum linhyo. Charan chinh dai nirbhai kinhyo.
Kari gopin sang ras bilasa. Sab ki pur kari abhilasa.
Aganit maha asur sanharyo. Kansahi kesh pakadi dai maryo.
Matu pita ki bandi chhudayo. Ugrasen kahan raj dilayo.
Him se mritak chhahon sut layo. Matu Devakl shok mitayo.
Narkasur mur khal sanhari. Lae shatdash sahas kumari.
Dai Bhimahin tran chiri isara. Jarasindh rakshas kahan mara.
Asur vrikasur adik maryau. Nij bhaktan kar kasht nivaryau.
Din Sudama ke dukh taryo. Tandul tin muthi mukh daryo.
Duryodhan ke tyagyo meva. Kiyo Vidur ghar shak kaleva.
Lakhi prem tuhin mahima bhari. Naumi Shyam danan hitkari.
Bharat men parath-rath hanke. Liye chakra kar nahin bat thake.
Nij Gita ke gyan sunaye. Bhaktan hridai sudha sarsaye.
Mira aisi matvali. vish pi gayi bajakar tali.
Rana bheja saap pitari. Shaligram bane banvari.
Nij maya tum vidhihin dikhayo. Urte sanshai sakal mitayo.
Tav shatninda kari tatkala, jivan mukt bhayo shishupala.
Jabahin Draupadi ter lagai. Dinanath laj ab jai.
Turatahih basan bane Nandlala. Badhay chir bhe ari munh kala.
As anath ke nath Kanhaiya. Dubat bhanvar bachavahi naiya.
“Sundardas” Aas ur Dharri. Daya Drishti Keejay Banwari.
Nath sakai un kumati nivaro. chhamon vegi apradh hamaro.
Kholo pat ab darshan dijai. Bolo Krishna Kanhaiya ki jai.
||Doha||
Yeh chalisa Krishna ka, path krai ur dhari,
asht siddhi nay niddhi phal, lahai padarath chari.
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Shree Ganesh Chalisa

Shree Ganesh Chalisa 

॥दोहा॥
जय गणपति सदगुण सदन, कविवर बदन कृपाल।
विघ्न हरण मंगल करण, जय जय गिरिजालाल॥
॥चौपाई॥
जय जय जय गणपति गणराजू। मंगल भरण करण शुभः काजू॥
जै गजबदन सदन सुखदाता। विश्व विनायका बुद्धि विधाता॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना। तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन॥
राजत मणि मुक्तन उर माला। स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं। मोदक भोग सुगन्धित फूलं॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित। चरण पादुका मुनि मन राजित॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता। गौरी लालन विश्व-विख्याता॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे। मुषक वाहन सोहत द्वारे॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी। अति शुची पावन मंगलकारी॥
एक समय गिरिराज कुमारी। पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा। तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी। बहुविधि सेवा करी तुम्हारी॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा। मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला। बिना गर्भ धारण यहि काला॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना। पूजित प्रथम रूप भगवाना॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै। पालना पर बालक स्वरूप हवै॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना। लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं। नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं। सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा। देखन भी आये शनि राजा॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं। बालक, देखन चाहत नाहीं॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो। उत्सव मोर, न शनि तुही भायो॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई। का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ। शनि सों बालक देखन कहयऊ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा। बालक सिर उड़ि गयो अकाशा॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी। सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा। शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो। काटी चक्र सो गज सिर लाये॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो। प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे। प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा। पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा॥
चले षडानन, भरमि भुलाई। रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें। तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे। नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई। शेष सहसमुख सके न गाई॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी। करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा। जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै। अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै॥
॥दोहा॥
श्री गणेश यह चालीसा, पाठ करै कर ध्यान।
नित नव मंगल गृह बसै, लहे जगत सन्मान॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश, ऋषि पंचमी दिनेश।
पूरण चालीसा भयो, मंगल मूर्ती गणेश॥
Shree Ganesh Chalisa in English:
॥Doha॥
Jaya Ganapati Sadhguna Sadana, Kavi Vara Badana Kripaala।
Vighna Harana Mangala Karana, Jaya Jaya Girijaa Laala॥
॥Chaupai॥
Jaya Jaya Ganapati Gan Raaju। Mangala Bharana Karana Shubha Kaaju॥
Jaya Gajabadana Sadana Sukhadaataa। Vishva Vinaayaka Buddhi Vidhaata॥
Vakra Tunda Shuchi Shunda Suhaavana। Tilaka Tripunda Bhaala Mana Bhaavana॥
Raajata Mani Muktana Ura Maala। Svarna Mukuta Shira Nayana Vishaala॥
Pustaka Paani Kuthaara Trishoolam। Modaka Bhoga Sugandhita Phoolam॥
Sundara Pitaambara Tana Saajita। Charana Paaduka Muni Mana Raajita॥
Dhani Shiva Suvana Shadaanana Bhraata। Gauri Lalana Vishva-Vidhaata॥
Riddhi Siddhi Tava Chanvara Sudhaare। Mushaka Vaahana Sohata Dvaare॥
Kahaun Janma Shubha Kathaa Tumhaari। Ati Shuchi Paavana Mangala Kaari॥
Eka Samaya Giriraaj Kumaari। Putra Hetu Tapa Kinha Bhaari॥
Bhayo Yagya Jaba Poorna Anoopa। Taba Pahunchyo Tuma Dhari Dvija Roopa॥
Atithi Jaani Kai Gauri Sukhaari। Bahuvidhi Sevaa Kari Tumhaari॥
Ati Prasanna Hvai Tuma Vara Dinha। Maatu Putra Hita Jo Tapa Kinha॥
Milahi Putra Tuhi Buddhi Vishaala। Binaa Garbha Dhaarana Yahi Kaala॥
Gananaayaka, Guna Gyaana Nidhaana। Poojita Prathama Roopa Bhagavana॥
Asa Kahi Antardhyaana Roopa Hvai। Palana Para Baalaka Svaroopa Hvai॥
Bani Shishu Rudana Jabahi Tuma Thaana। Lakhi Mukha Sukha Nahin Gauri Samaan॥
Sakala Magana, Sukha Mangala Gaavahin। Nabha Te Surana Sumana Varshaavahin॥
Shambhu Uma, Bahu Dana Lutavahin। Sura Munijana, Suta Dekhana Aavahin॥
Lakhi Ati Aananda Mangala Saaja। Dekhana Bhi Aaye Shani Raaja॥
Nija Avaguna Guni Shani Mana Maahin। Baalaka, Dekhan Chaahata Naahin॥
Giraja Kachhu Mana Bheda Badhaayo। Utsava Mora Na Shani Tuhi Bhaayo॥
Kahana Lage Shani, Mana Sakuchaai। Kaa Karihau, Shishu Mohi Dikhaai॥
Nahin Vishvaasa, Uma Ur Bhayau, Shani So Baalaka Dekhana Kahyau। ॥
Padatahin, Shani Driga Kona Prakaasha। Baalaka Shira Udi Gayo Aakaasha॥
Giraja Girin Vikala Hvai Dharani। So Dukha Dasha Gayo Nahin Varani॥
Haahaakaara Machyo Kailaasha। Shani Kinhyon Lakhi Suta Ka Naasha॥
Turata Garuda Chadhi Vishnu Sidhaaye। Kaati Chakra So Gaja Shira Laaye॥
Baalaka Ke Dhada Upara Dhaarayo। Praana, Mantra Padha Shankara Darayo॥
Naama ‘Ganesha’ Shambhu Taba Kinhe। Prathama Poojya Buddhi Nidhi, Vara Dinhe॥
Buddhi Pariksha Jaba Shiva Kinha। Prithvi Kar Pradakshina Linha॥
Chale Shadaanana, Bharami Bhulaii। Rachi Baitha Tuma Buddhi Upaai॥
Charana Maatu-Pitu Ke Dhara Linhen। Tinake Saata Pradakshina Kinhen॥
Dhani Ganesha, Kahi Shiva Hiya Harashe। Nabha Te Surana Sumana Bahu Barase॥॥
Tumhari Mahima Buddhi Badaye। Shesha Sahasa Mukha Sakai Na Gaai॥
Mein Mati Hina Malina Dukhaari। Karahun Kauna Vidhi Vinaya Tumhaari॥
Bhajata ‘Raamasundara’ Prabhudaasa। Lakha Prayaga, Kakara, Durvasa॥
Aba Prabhu Daya Dina Para Kijai। Apani Bhakti Shakti Kuchhu Dijai॥
॥Doha॥
Shri Ganesh Yah Chalisa, Path Karai Dhari Dhyan।
Nit Nav Mangal Gruha Bashe, Lahi Jagat Sanman॥
Sambandh Apne Sahstra Dash, Rushi Panchami Dinesh।
Puran Chalisa Bhayo, Mangal Murti Ganesha॥
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Shree Bajrang Bali

Shree Bajrang Bali 

॥दोहा॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते, बिनय करै सनमान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥
॥चौपाई॥
जय हनुमन्त सन्त हितकारी। सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥
जन के काज विलम्ब न कीजै। आतुर दौरि महा सुख दीजै॥
जैसे कूदि सिन्धु वहि पारा। सुरसा बदन पैठि बिस्तारा॥
आगे जाय लंकिनी रोका। मारेहु लात गई सुर लोका॥
जाय विभीषण को सुख दीन्हा। सीता निरखि परम पद लीन्हा॥
बाग उजारि सिन्धु महं बोरा। अति आतुर यम कातर तोरा॥
अक्षय कुमार मारि संहारा। लूम लपेटि लंक को जारा॥
लाह समान लंक जरि गई। जय जय धुनि सुर पुर महं भई॥
अब विलम्ब केहि कारण स्वामी। कृपा करहुं उर अन्तर्यामी॥
जय जय लक्ष्मण प्राण के दाता। आतुर होइ दु:ख करहुं निपाता॥
जय गिरिधर जय जय सुख सागर। सुर समूह समरथ भटनागर॥
ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्त हठीले। बैरिहिं मारू बज्र की कीले॥
गदा बज्र लै बैरिहिं मारो। महाराज प्रभु दास उबारो॥
ॐकार हुंकार महाप्रभु धावो। बज्र गदा हनु विलम्ब न लावो॥
ॐ ह्रीं ह्रीं ह्रीं हनुमन्त कपीसा। ॐ हुं हुं हुं हनु अरि उर शीशा॥
सत्य होउ हरि शपथ पायके। रामदूत धरु मारु धाय के॥
जय जय जय हनुमन्त अगाधा। दु:ख पावत जन केहि अपराधा॥
पूजा जप तप नेम अचारा। नहिं जानत कछु दास तुम्हारा॥
वन उपवन मग गिरि गृह माहीं। तुमरे बल हम डरपत नाहीं॥
पाय परौं कर जोरि मनावों। यह अवसर अब केहि गोहरावों॥
जय अंजनि कुमार बलवन्ता। शंकर सुवन धीर हनुमन्ता॥
बदन कराल काल कुल घालक। राम सहाय सदा प्रतिपालक॥
भूत प्रेत पिशाच निशाचर। अग्नि बैताल काल मारीमर॥
इन्हें मारु तोहि शपथ राम की। राखु नाथ मरजाद नाम की॥
जनकसुता हरि दास कहावो। ताकी शपथ विलम्ब न लावो॥
जय जय जय धुनि होत अकाशा। सुमिरत होत दुसह दु:ख नाशा॥
चरण शरण करि जोरि मनावों। यहि अवसर अब केहि गोहरावों॥
उठु उठु चलु तोहिं राम दुहाई। पांय परौं कर जोरि मनाई॥
ॐ चं चं चं चं चपल चलन्ता। ॐ हनु हनु हनु हनु हनुमन्ता॥
ॐ हं हं हांक देत कपि चञ्चल। ॐ सं सं सहम पराने खल दल॥
अपने जन को तुरत उबारो। सुमिरत होय आनन्द हमारो॥
यहि बजरंग बाण जेहि मारो। ताहि कहो फिर कौन उबारो॥
पाठ करै बजरंग बाण की। हनुमत रक्षा करै प्राण की॥
यह बजरंग बाण जो जापै। तेहि ते भूत प्रेत सब कांपे॥
धूप देय अरु जपै हमेशा। ताके तन नहिं रहे कलेशा॥
॥दोहा॥
प्रेम प्रतीतिहिं कपि भजै, सदा धरै उर ध्यान।
तेहि के कारज सकल शुभ, सिद्ध करै हनुमान॥
Shree Bajrang Baan in English:
॥Doha॥
Nishchaya Prema Pratiti Te, Binaya Karai Sanamana।
Tehi Ke Karaja Sakala Shubha, Siddha Karai Hanuman॥
॥Chaupai॥
Jaya Hanumanta Santa Hitakari। Suni Lijai Prabhu Araja Hamari॥
Jan Ke Kaja Vilamba Na Kijai। Atura Dauri Maha Sukha Dijai॥
Jaise Kudi Sindhu Wahi Para। Surasa Badana Paithi Bistara॥
Age Jaya Lankini Roka। Marehu Lata Gai Sura Loka॥
Jaya Vibhishana Ko Sukha Dinha। Sita Nirakhi Parama Pada Linha॥
Baga Ujari Sindhu Maham Bora। Ati Atura Yama Katara Tora॥
Akshaya Kumara Mari Sanhara। Luma Lapeti Lanka Ko Jara॥
Laha Samana Lanka Jari Gai। Jaya Jaya Dhuni Sura Pura Maham Bhai॥
Aba Vilamba Kehi Karana Swami। Kripa Karahun Ura Antaryami॥
Jaya Jaya Lakshmana Prana Ke Data। Atura Hoi Dukha Karahun Nipata॥
Jai Giridhara Jai Jai Sukha Sagara। Sura Samuha Samaratha Bhatanagara॥
Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta Hathile। Bairihin Maru Bajra Ki Kile॥
Gada Bajra Lai Bairihin Maro। Maharaja Prabhu Dasa Ubaro॥
Omkara Hunkara Mahaprabhu Dhavo। Bajra Gada Hanu Vilamba Na Lavo॥
Om Hrim Hrim Hrim Hanumanta Kapisa। Om Hum Hum Hum Hanu Ari Ura Shisha॥
Satya Hou Hari Shapatha Payake। Ramaduta Dharu Maru Dhaya Ke॥
Jaya Jaya Jaya Hanumanta Agadha। Dukha Pavata Jana Kehi Aparadha॥
Puja Japa Tapa Nema Achara। Nahin Janata Kachhu Dasa Tumhara॥
Vana Upavana Maga Giri Griha Mahin। Tumare Bala Hama Darapata Nahin॥
Paya Paraun Kara Jori Manavon। Yaha Avasara Aba Kehi Goharavon॥
Jaya Anjani Kumara Balavanta। Shankara Suvana Dhira Hanumanta॥
Badana Karala Kala Kula Ghalaka। Rama Sahaya Sada Pratipalaka॥
Bhuta Preta Pishacha Nishachara। Agni Baitala Kala Marimara॥
Inhen Maru Tohi Shapatha Rama Ki। Rakhu Natha Marajada Nama Ki॥
Janakasuta Hari Dasa Kahavo। Taki Shapatha Vilamba Na Lavo॥
Jai Jai Jai Dhuni Hota Akasha। Sumirata Hota Dusaha Dukha Nasha॥
Charana Sharana Kari Jori Manavon। Yahi Avasara Aba Kehi Goharavon॥
Uthu Uthu Chalu Tohin Rama Duhai। Panya Paraun Kara Jori Manai॥
Om Chan Chan Chan Chan Chapala Chalanta। Om Hanu Hanu Hanu Hanu Hanumanta॥
Om Han Han Hanka Deta Kapi Chanchala। Om San San Sahama Parane Khala Dala॥
Apane Jana Ko Turata Ubaro। Sumirata Hoya Ananda Hamaro॥
Yahi Bajrang Baan Jehi Maro। Tahi Kaho Phira Kauna Ubaro॥
Patha Karai Bajrang Baan Ki। Hanumata Raksha Karai Prana Ki॥
Yaha Bajrang Baan Jo Japai। Tehi Te Bhuta Preta Saba Kampe॥
Dhupa Deya Aru Japai Hamesha। Take Tana Nahin Rahe Kalesha॥
॥Doha॥
Prema Pratitin Kapi Bhajai, Sada Dharai Ura Dhyana।
Tehi Ke Karaja Sakala Shubha, Siddha Karai Hanuman॥
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श्री हनुमान चालीसा/Shree Hanuman Chalisa

Shree Hanuman Chalisa 

॥दोहा॥
श्री गुरु चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि।
बरनउं रघुबर विमल जसु, जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिकै, सुमिरौं पवन-कुमार।
बल बुद्धि विद्या देहु मोहिं, हरहु कलेश विकार॥
॥चौपाई॥
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर। जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा। अंजनि-पुत्र पवनसुत नामा॥
महावीर विक्रम बजरंगी। कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुवेसा। कानन कुण्डल कुंचित केसा॥
हाथ वज्र औ ध्वजा बिराजै। काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
शंकर सुवन केसरीनन्दन। तेज प्रताप महा जग वन्दन॥
विद्यावान गुणी अति चातुर। राम काज करिबे को आतुर॥
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया। राम लखन सीता मन बसिया॥
सूक्ष्म रुप धरि सियहिं दिखावा। विकट रुप धरि लंक जरावा॥
भीम रुप धरि असुर संहारे। रामचन्द्र के काज संवारे॥
लाय सजीवन लखन जियाये। श्रीरघुवीर हरषि उर लाये॥
रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई। तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥
सहस बदन तुम्हरो यश गावैं। अस कहि श्री पति कंठ लगावैं॥
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा। नारद सारद सहित अहीसा॥
जम कुबेर दिकपाल जहां ते। कवि कोबिद कहि सके कहां ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा। राम मिलाय राज पद दीन्हा॥
तुम्हरो मन्त्र विभीषन माना। लंकेश्वर भये सब जग जाना॥
जुग सहस्त्र योजन पर भानू । लील्यो ताहि मधुर फ़ल जानू॥
प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं। जलधि लांघि गए अचरज नाहीं॥
दुर्गम काज जगत के जेते। सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥
राम दुआरे तुम रखवारे। होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
सब सुख लहै तुम्हारी सरना। तुम रक्षक काहू को डरना॥
आपन तेज सम्हारो आपै। तीनों लोक हांक तें कांपै॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै। महावीर जब नाम सुनावै॥
नासै रोग हरै सब पीरा। जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट ते हनुमान छुड़ावै। मन क्रम वचन ध्यान जो लावै॥
सब पर राम तपस्वी राजा। तिन के काज सकल तुम साजा॥
और मनोरथ जो कोई लावै। सोइ अमित जीवन फ़ल पावै॥
चारों जुग परताप तुम्हारा। है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु सन्त के तुम रखवारे। असुर निकन्दन राम दुलारे॥
अष्ट सिद्धि नवनिधि के दाता। अस बर दीन जानकी माता॥
राम रसायन तुम्हरे पासा। सदा रहो रघुपति के दासा॥
तुम्हरे भजन राम को पावै। जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अन्तकाल रघुबर पुर जाई। जहाँ जन्म हरि-भक्त कहाई॥
और देवता चित्त न धरई। हनुमत सेई सर्व सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा। जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥
जय जय जय हनुमान गोसाई। कृपा करहु गुरुदेव की नाई॥
जो शत बार पाठ कर सोई। छूटहिं बंदि महा सुख होई॥
जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा। होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
तुलसीदास सदा हरि चेरा। कीजै नाथ ह्रदय महँ डेरा॥
॥दोहा॥
पवनतनय संकट हरन, मंगल मूरति रुप।
राम लखन सीता सहित ह्रदय बसहु सुर भूप॥
Shri Hanuman Chalisa in English:
॥Doha॥
Shri Guru Charan Saroj Raj, Nij manu Mukuru Sudhaari।
Barnau Raghubar Bimal Jasu, Jo Daayeku Phal Chaari॥
Buddhiheen Tanu Jaanike, Sumirau Pavan-Kumaar।
Bal Buddhi Bidya Dehu Mohi, Harahu Kales Bikaar॥
॥Chaupai॥
Jai Hanuman Gyaan Gun Sagar। Jai Kapis Teehun Lok Ujagar॥
Ram Doot Atulit Bal Dhama। Anjani-Putra Pavansut Nama॥
Mahabir Bikram Bajrangi। Kumati Nivaar Sumati Ke Sangi॥
Kanchan Baran Biraaj Subesa। Kaanan Kundal Kunchit Kesa॥
Haath Bajra Aau Dhwaja Biraaje। Kaandhe Moonj Janeu Saaje॥
Sankar Suvan Kesarinandan। Tej Prataap Maha Jag Bandan॥
Bidyabaan Guni Ati Chaatur। Ram Kaaj Karibe Ko Aatur॥
Prabhu Charitra Sunibe Ko Rasiya। Ram Lakhan Sita Man Basiya॥
Sukshma Roop Dhari Siyahin Dikhawa। Bikat Roop Dhari Lanka Jarawa॥
Bheem Roop Dhari Asur Sanhaare। Ramchandra Ke Kaaj Sanwaare॥
Laaye Sajivan Lakhan Jiyaaye। Shri Raghubeer Harashi Ur Laaye॥
Raghupati Keenhi Bahut Badai। Tum Mum Priy Bharat Hi Sam Bhai॥
Sahas Badan Tumhro Jas Gaavein। As Kahi Shripati Kanth Lagavein॥
Sankadik Bramhadi Munisa। Narad Sarad Sahit Ahisa॥
Jam Kuber Digpaal Jahan Te। Kabi Kobid Kahi Sake Kahaan Te॥
Tum Upkaar Sugreevhin Kinha। Ram Milaaye Raajpad Dinha॥
Tumhro Mantra Vibhishan Maana। Lankeswar Bhaye Sab Jag Jana॥
Jug Sahastra Jojan Par Bhaanu। Lilyo Taahi Madhur Phal Jaanu॥
Prabhu Mudrika Meli Mukh Maahi। Jaldhi Laanghi Gaye Achraj Naahi॥
Durgam Kaaj Jagat Ke Jete। Sugam Anugraha Tumhre Tete॥
Ram Dooare Tum Rakhwaare। Hoat Na Aagya Binu Paisare॥
Sab Sukh Lahai Tumhari Sarna। Tum Rakhshak Kaahu Ko Darna॥
Aapan Tej Samharo Aapai। Teeno Lok Haank Te Kaanpen॥
Bhoot Pisaach Nikat Nahi Aave। Mahabir Jab Naam Sunave॥
Naasai Rog Harai Sab Peera। Japat Nirantar Hanumat Beera॥
Sankat Te Hanuman Chhoodave। Man Krama Bachan Dhyaan Jo Laave॥
Sab Par Raam Tapasvi Raja। Tin Ke Kaaj Sakal Tum Saaja॥
Aur Manorath Jo Koi Laave। Soi Amit Jivan Phal Paave॥
Chaaro Jug Partaap Tumhara। Hai Parsiddh Jagat Ujiyara॥
Saadhu Sant Ke Tum Rakhwaare। Asur Nikandan Ram Dulaare॥
Asht Siddhi Nau Nidhi Ke Daata। As bar Deen Janki Maata॥
Ram Rasayan Tumhre Paasa। Sada Raho Raghupati Ke Daasa॥
Tumhre Bhajan Ram Ko Paave। Janam Janam Ke Dukh Bisraave॥
Antakaal Raghubar Pur Jaayee। Jahan Janam Hari-Bhakt Kahayee॥
Aur Devta Chitt Na Dharayi। Hanumat Sei Sarb Sukh Karayi॥
Sankat Kate Mite Sab Peera। Jo Sumirai Hanumat Balbira॥
Jai Jai Jai Hanuman Gosaai। Kripa Karahun Gurudev Ki Naai॥
Jo Sat Baar Paath Kar Koi। Chhootahin Bandi Maha sukh Hoyi॥
Jo Yeh Padhe Hanuman Chalisa। Hoye Siddhi Saakhi Gaurisa॥
Tulsidas Sada Harichera। Kije Naath Hridaya Mahn Dera॥
॥Doha॥
Pavantanaye Sankat Haran, Mangal Moorti Roop।
Ram Lakhan Sita Sahit Hridaya Basahu Soor Bhoop॥